सूर्यनारायण रणसुभे अनुक्रम कृतियाँ पुरस्कार दिक्चालन सूची

कर्नाटकलातूरमहाराष्ट्र




डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे समकालीन हिंदी के एक प्रमुख साहित्यकार हैं। वे हिंदी के अध्यापक रहे हैं। वह एक आलोचक एवं लेखक के रूप में ज़्यादा जाने जाते हैं। उनकी विभिन्न रचनाओं के लिए उन्हे विविध पुरस्न्कार से सन्मानित किया गया हैं।


डॉ सूर्यनारायण का जन्म ७ अगस्त १९४२ को कर्नाटक राज्य में हुआ। उन्होने हिन्दी में एम. ए. किया हैं तथा वे पीएच.डी भी हैें। लातूर (महाराष्ट्र) स्थित दयानन्द कला महाविद्यालय के हिंदी विभाग में उन्होने कुल ३७ वर्ष अध्यापन कार्य किया हैं।




अनुक्रम





  • 1 कृतियाँ

    • 1.1 हिन्दी में प्रकाशित समीक्षात्मक ग्रंथ


    • 1.2 अनुवाद कार्य

      • 1.2.1   मराठी से हिन्दी में


      • 1.2.2 हिंदी से मराठी में




  • 2 पुरस्कार

    • 2.1 सम्मान





कृतियाँ



हिन्दी में प्रकाशित समीक्षात्मक ग्रंथ


  1. आधुनिक मराठी साहित्य का प्रवृत्तिमूलक इतिहासः ग्रंथम्, कानपुर, १९७६

  2. कहानीकार कमलेश्वरः संदर्भ और प्रकृति, पंचशील प्रकाशन, जयपूर, १९७७

  3. देश-विभाजन और हिंदी कथा- साहित्य, विकास प्रकाशन, कानपूर, १९८७

  4. जीवनीपरक हिंदी साहित्य, यशवंतराव चव्हाण मुक्त विश्वविद्यालय, नासिक २००२

  5. प्रादेशिक भाषा और सहित्येतिहास, लातूर जिला हिन्दी साहित्य परिषद, लातूर, २००४

  6. आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास, विकास प्रकाशन, कानपूर २००५

  7. दलित साहित्यः स्वरूप और संवेदनाः अमित प्रकाशन, गाजियाबाद, २००९

  8. अनुवाद का समाजशास्त्रः अमित प्रकाशन, गाजियाबाद, २००९

  9. डॉ. बाबासाहब आंबेडकर (जीवनी), राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली, १९९१

  10. पत्रकार डॉ. भीमराव आंबेडकरः प्रभात प्रकाशन, दिल्ली, २०१०

  11. १९ वी. शती का नवजागरण और हिन्दी साहित्यः यश प्रकाशन, दिल्ली, २०१३

  12. २० वी शती का नवजागरण और हिंदी साहित्यः यश प्रकाशन, दिल्ली, २०१३

  13. हिन्दी साहित्य का अभिनव इतिहासः डॉ. घ. म. भुतडा के साथ शारदा प्रकाशन, नांदेड - १९७८

  14. हिन्दी उपन्यासः विविध आयाम : डॉ. चंद्रभानु सोनवणे के साथ, पुस्तक संस्थान, कानपूर, १९८०

  15. कहानीकार अज्ञेयः  संदर्भ और प्रकृति,  डॉ. चंद्रभानु सोनवणे के साथ  विकास प्रकाशन, कानपुर, १९८०

  16. साहित्यशास्त्र: डॉ. नरसिंहप्रसाद दुबे के साथ, आरती प्रकाशन, औरंगाबाद - १९९५


अनुवाद कार्य



  मराठी से हिन्दी में


अ) सर्जनात्मक साहित्य


  1. आठवणीतले पक्षी (आत्मकथा)  श्री. प्र. ई. सोनकांबळे

  2. यादों के पंछी, राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली - १९८३

  3. अक्करमाशी (आत्मकथा) डॉ. शरणकुमार लिंबाळे

  4. अक्करमाशी, ग्रंथ अकादमी, दिल्ली - १९९१

  5. उचल्या (आत्मकथा) - लक्ष्मण गायकवाड

  6. उठाईगीर, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली - १९९५

  7. साक्षीपुरम् (नाटक), रामनाथ चव्हाण -प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली - १९९१

  8. बामनवाडा, रामनाथ चव्हाण -वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली - २००४

  9. हिन्दू (उपन्यास), शरणकुमार लिंबाले -वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली - २००४

  10. बहुजन (उपन्यास), शरणकुमार लिंबाले -वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली - २००८

  11. अश्मक (नाटक), दत्ता भगत

  12. युद्धरत आम आदमी, नई दिल्ली

  13. निळ्या नभाची कांती (नाटक), रामनाथ चव्हाण

  14. नीले नभ की कांति (नाटक) - अनुबंध प्रकाशन, पुणे - २०१३

आ) वैचारिक साहित्यः


  1. समाज परिवर्तनाच्या दिशा, डॉ. जे. एम. वाघमारे समाज परिवर्तन की दिशाएँ - विकास प्रकाशन, कानपूर - १९९८

  2. भारतीय मुसलमानोंकी मानसिकता और सामाजिक संरचना, पहल प्रकाशन, जबलपूर - १९९८

  3. मनुष्य और धर्मचिंतन, रावसाहेब कसबे, संवाद प्रकाशन, मेरठ - २००९

  4. पिछडों का सामाजिक- राजनीतिक आंदोलन, उत्तम कांबळे गौतम बुक सेंटर, दिल्ली - २००९

  5. दलितेतरों के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, डॉ. प्रल्हाद लुलेकर सम्यक प्रकाशन, दिल्ली - २०१३

  6. टीका - स्वयंवर, डॉ. भालचंद्र नेमाडे, साहित्य अकादमी, दिल्ली - २०१३

२)   संपादन:


  1. दलित कहानियाँ, डॉ. कमलाकर गंगावणे के साथ, पंचशील प्रकाशन, जयपूर - १९८१

  2. दलित साहित्य वेदना और विद्रोह, मूल संपादकः डॉ. शरणकुमार लिंबाले

  3. 'वागर्थ' भारतीय भाषा परिषद कोलकता का अतिथि संपादक -दिसंबर २०१० का 'वागर्थ' का समकालीन मराठी साहित्य विशेषांक

  4. 'युद्धरत आम आदमी' नई दिल्ली, अप्रैल २०११ का डॉ. शरणकुमार लिंबाले विशेषांक का अतिथि संपादक

  5. दलित चेतना की पहचानः वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, २०१३

  6. प्रज्ञासूर्यः मूल संपादक, डॉ. शरणकुमार लिंबाले -अनुवाद संपादक, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली - २०१३

  7. दलित साहित्य की वैचारिक पृष्ठभूमि, डॉ. जे. एम. वाघमारे -अनुवाद संपादक, अनय प्रकाशन, नई दिल्ली - २०१३

  8. काव्य-प्रदीपः आधुनिक हिंदी कविता का संकलन, -परिदृश्य प्रकाशन, मुंबई - २०१०

लेखन/अनुवाद/संपादनः मराठी


मराठीः


१) ललित


  1. स्पंदनः ललित लेखों का संग्रह, प्रचार प्रकाशन, कोल्हापूर - १९९१

  2. कहानी संस्कृतीची ललित लेखों का संग्राह, साक्षात् प्रकाशन, औरंगाबाद - २०१०

२) वैचारिक


  1. मी, तुम्ही धर्म आणि सत्ताः स्वरूप प्रकाशन, औरंगाबाद - २००४

  2. अनुवाद, वर्णव्यवस्था आणि मीः भूमी प्रकाशन, लातूर - २००६

  3. समताः लोकशिक्षण ग्रंथमाला, लातूर, ऑक्टोबर - २००४

शब्दांकन


  1. हैदराबाद मुक्ती संग्राम आणि मी श्री. चंद्रशेखर बाजपेयी -कैलास पब्लिकेशन, औरंगाबाद - जनवरी १९९५

३)     संपादन


  1. गिरीकंदरातूनः प्राचार्य राजाराम राठोड, गौरवग्रंथ प्रकाशकः अशोक चव्हाण/ वसंतराव नाईक महाविद्यालय - १९९४

  2. परिवर्तन, संकल्पना आणि वास्तवछ डॉ. जे. एम. वाघमारे गौरव ग्रंथ, नांदेड - १९९९

  3. गाथा पूरणमलजीची आणि जडण-घडण मराठवाड्याची,  स्व. पूरणमलजी लाहोटी, स्मृतिग्रंथ समिती, लातूर-२००९

  4. ध्यास परिवर्तनाचाः डॉ. जनार्दन वाघमारे गौरव ग्रंथ समिति, लातूर- २०११


हिंदी से मराठी में


  1. मार्क्सवादाचे आजच्या काळातील महत्त्वः एजाज अहमद, १९९७

  2. मार्क्सवादाचे स्वप्न आणि नवी फेर मांडणीः रमेश उपाध्याय, लोकवाड्मय गृह, मुंबई - १९९७

  3. संरचनावाद, उत्तर संरचनावाद आणि प्राच्य काव्यशास्त्र, गोपीचंद नारंग साहित्य अकादमी,  मुंबई - २००५/२०१२

  4. झूठा सच (खोट सत्य), यशपाल, साहित्य अकादमी, मुंबई - २००४


पुरस्कार


  1. केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्लीद्वारा उत्कृष्ट अनुवाद के रुप में 'यादों के पंछी' (आठवणीतले पक्षीः प्रा. प्र. ई. सोनकांबळे की मराठी आत्मकथा का हिंदी अनुवाद)  पुरस्कृत (राशी पाच हजार) वर्ष १९८४

  2. महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबईव्दारा - 'मराठी भाषिक हिंदी लेखक के रूप में  गं. मा. मुक्तिबोध पुरस्कार (राश दस हजार) वर्ष १९८९

  3. हिंदी प्रचार सभा, हैदराबादद्वारा साहित्यचार्य की उपाधि प्रदान, जुलाई १९९४ में

  4. अंकुर वाड्मय पुरस्कार अकोला 'मी तुम्ही धर्म आणि सत्ता' यह ग्रंथ पुरस्कृत, २००४

  5. महाराष्ट्र तत्त्वज्ञान परिषदद्वारा उत्कृष्ट वैचारिक ग्रंथ के रुप में 'तुम्ही धर्म आणि सत्ता' को  गोयनका फाऊंडेशन पुरस्कार (राशि पाच हजार), नवंबर २००५

  6. सुशील फोरम सोलापूर की ओर से साहित्यकार पुरस्कार (राशि १० हजार) २००८

  7. उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थानद्वारा सौहार्द पुरस्कार (राशि १ लाख) फरवरी २००९

  8. साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा यशपाल के 'झुठा सच' के मराठी अनुवाद 'खोटं सत्य' को उत्कृष्ट अनुवाद पुरस्कार (राशि २५ हजार) सितंबर २००९

  9. आचार्य आनंदऋषि साहित्य पुरस्कारः हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक रूप में, हैदराबाद (राशि २० हजार) २००९

  10. गुणीजन साहित्य पुरस्कार 'अनुवाद, वर्ण व्यवस्था आणि मी' ग्रंथ पर हैदराबाद


सम्मान


  1. लातूर नगरवासियों, भूतपूर्व छात्रों तथा मित्रों द्वारा गठित 'डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे गौरव समिति' ने ९ दिसंबर २००२ को लेखक श्री. कमलेश्वर की अध्यक्षता में अभिनंदन किया, मानपत्र दिया।

  2. लातूर जिला रौप्यमहोत्सव के अवसरपर सन २००७ में लातूर जिले के जिन २५ प्रतिष्ठित और विशेष नागरिकों का सम्मान तत्कालीन श्री. विलासरावजी देशमुख के हाथों किया गया,  उनमें से एक सूर्यनारायण रणसुभें जी थे। जनवरी २००७

  3. मराठवाडा के दै. एकमत द्वारा सन २००८ में 'जीवन - गौरव सम्मान' एकमत दीपोत्सव २००८ के विशेषांक में लंबा साक्षात्कार, जीवनपरिचय और अन्य लेख। नवंबर २००८

  4. अमळनेर (जिला जलगांव, महाराष्ट्र) की संस्था वाग्विभूति व्दारा जीवन गौरव पुरस्कार। फरवरी २००९

  5. यशवंतराव चव्हाण, प्रतिष्ठान मुंबई, शाखा लातूर, लातूर जिला हिंदी साहित्य परिषद, लातूर तथा मराठवाडा साहित्य परिषद, शाखा लातूर द्वारा साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रदत्त उत्कृष्ट अनुवाद का राष्ट्रीय पुरस्कार तथा उत्तर प्रदेश साहित्य संस्थान द्वारा प्रदत्त सौहार्द पुरस्कार हेतु सार्वजनिक सम्मान लातूर में.

  6. सन २००२ में अवकाश ग्रहण करनेपर मराठी की प्रतिष्ठित वैचारिक पत्रिका विचारशलाका (सं. डॉ. नागोराव कुंभार) द्वारा मराठी के प्रतिष्ठित लेखक डॉ. भालचंद्र नेमाडे के हाथों सार्वजनिक सम्मान तथा डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे के व्यक्तित्व और विचारोंपर केंद्रित विचारशलाका का गौरवांक प्रकाशित अप्रैल/ सितंबर २००२ संयुक्तांक

  7. सन २००२ में अवकाश ग्रहण करने पर डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे पर गौरवग्रंथ प्रकाशित। 'उत्तरशक्तीः चिंतन स्थितियॉः डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे गौरव ग्रंथः सं. डॉ. सुरेश माहेश्वरी तथा डॉ. नागनाथ कुंटे, भावना प्रकाशन, दिल्ली, पृष्ठ ४०० मुल्य

  8. सन २००२ तक डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे के प्रकाशित साहित्य पर प्रतिष्ठान महाविद्यालय  पैठण के हिंदी प्राध्यापक डॉ. मजीद शेख व्दारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विश्वविद्यालय, औरंगाबाद से पीएच.डी. उपाधी प्राप्त। शोध प्रबंध प्रकाशित।  ''डॉ. सूर्यनारायण रणसुभेः व्यक्तित्व एवं कृतित्व'' लेखक डॉ. मजीद शेख/ अतुल प्रकाशन, कानपुर/ सन २०१२, पृ. ३७६, मुल्य ८००/-

  9. मराठवाडा साहित्य परिषद, औरंगाबाद के ३१ वे मराठवाडा साहित्य सम्मेलन (मुरूड, जिला लातूर) में डॉ. रणसुभे का विशेष सम्मान। अधिवेशन तिथि ११ तथा १२ फरवरी २०१० सम्मान तिथि १२ फरवरी २०१०

  10. बौद्ध परिषद द्वारा २४ दिसंबर २०१२ में केज जिला बीड में आयोजित प्रथम बौद्ध साहित्य सम्मेलन में हिंदी - मराठी तथा मराठी-हिंदी में अनुवाद विषयक विशेष कार्य करने हेतु डॉ. भदन्त आनंद कौसल्यायन पुरस्कार से सम्मानित। तिथि २४ दिसंबर २०१२


Popular posts from this blog

बाताम इन्हें भी देखें सन्दर्भ दिक्चालन सूची1°05′00″N 104°02′0″E / 1.08333°N 104.03333°E / 1.08333; 104.033331°05′00″N 104°02′0″E / 1.08333°N 104.03333°E / 1.08333; 104.03333

Why is the 'in' operator throwing an error with a string literal instead of logging false?Why can't I use switch statement on a String?Python join: why is it string.join(list) instead of list.join(string)?Multiline String Literal in C#Why does comparing strings using either '==' or 'is' sometimes produce a different result?How to initialize an array's length in javascript?How can I print literal curly-brace characters in python string and also use .format on it?Why does ++[[]][+[]]+[+[]] return the string “10”?Why is char[] preferred over String for passwords?Why does this code using random strings print “hello world”?jQuery.inArray(), how to use it right?

How can we generalize the fact of finite dimensional vector space to an infinte dimensional case?$k[x]$-module and cyclic module over a finite dimensional vector spaceSubspace of a finite dimensional space is finite dimensionalIf V is an infinite-dimensional vector space, and S is an infinite-dimensional subspace of V, must the dimension of V/S be finite? ExplainWhy is an infinite dimensional space so different than a finite dimensional one?base for finite dimensional vector space is not infinite dimensional vector space?Any finite-dimensional vector space is the dual space of anotherHaving Trouble Understanding Meaning Of A Finite-Dimensional Vector SpaceProve that “Every subspaces of a finite-dimensional vector space is finite-dimensional”Ring as a finite dimensional Vector space over a field KQuestion regarding basis and dimension