मोहन राकेश अनुक्रम नाट्य-लेखन प्रमुख कृतियाँ सम्मान सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ दिक्चालन सूचीअपने दौर के महानायक कहलाए मोहन राकेशनई कहानी आंदोलन के स्तंभ मोहन राकेशसंसं

लेख जिन्हें अप्रैल 2014 से अतिरिक्त संदर्भ की आवश्यकता हैहिन्दी साहित्यकार (जन्म १९२१-१९३०)हिन्दी कथाकारहिन्दी उपन्यासकारहिन्दी नाटककारअमृतसर के लोग1925 में जन्मे लोग१९७२ में निधन


नई कहानीपंजाब विश्वविद्यालयहिन्दीअंग्रेज़ीआषाढ़ का एक दिनलहरों के राजहंसभारतेन्दुप्रसादइब्राहीम अलकाजीओम शिवपुरीअरविन्द गौड़श्यामानन्द जालानराम गोपाल बजाजदिनेश ठाकुरसंगीत नाटक अकादमी१९६८





मोहन राकेश ने आरिएंटल कालेज, लाहौर से संस्क्रीत मे एम.ए. किया। ईनका असली नाम मदनमोहन मुगलानी था।










मोहन राकेश



जन्म

८ जनवरी, १९२५
अमृतसर
मृत्यु

३ जनवरी, १९७२
दिल्ली
व्यवसाय
साहित्यकार

मोहन राकेश(८ जनवरी १९२५ - ३ जनवरी, १९७२) नई कहानी आन्दोलन के सशक्त हस्ताक्षर थे।


पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए किया। जीविकोपार्जन के लिये अध्यापन। कुछ वर्षो तक 'सारिका' के संपादक। 'आषाढ़ का एक दिन','आधे अधूरे' और लहरों के राजहंस के रचनाकार। 'संगीत नाटक अकादमी' से सम्मानित। ३ जनवरी १९७२ को नयी दिल्ली में आकस्मिक निधन। मोहन राकेश हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और उपन्यासकार हैं। समाज के संवेदनशील व्यक्ति और समय के प्रवाह से एक अनुभूति क्षण चुनकर उन दोनों के सार्थक सम्बन्ध को खोज निकालना, राकेश की कहानियों की विषय-वस्तु है।
मोहन राकेश की डायरी हिंदी में इस विधा की सबसे सुंदर कृतियों में एक मानी जाती है।




अनुक्रम





  • 1 नाट्य-लेखन


  • 2 प्रमुख कृतियाँ


  • 3 सम्मान


  • 4 सन्दर्भ


  • 5 बाहरी कड़ियाँ




नाट्य-लेखन


मोहन राकेश को कहानी के बाद सफलता नाट्य-लेखन के क्षेत्र में मिली। हिंदी नाटकों में भारतेंदु और प्रसाद के बाद का दौर मोहन राकेश का दौर है जिसें हिंदी नाटकों को फिर से रंगमंच से जोड़ा। हिन्दी नाट्य साहित्य में भारतेन्दु और प्रसाद के बाद यदि लीक से हटकर कोई नाम उभरता है तो मोहन राकेश का। हालाँकि बीच में और भी कई नाम आते हैं जिन्होंने आधुनिक हिन्दी नाटक की विकास-यात्रा में महत्त्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं; किन्तु मोहन राकेश का लेखन एक दूसरे ध्रुवान्त पर नज़र आता है। इसलिए ही नहीं कि उन्होंने अच्छे नाटक लिखे, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने हिन्दी नाटक को अँधेरे बन्द कमरों से बाहर निकाला और उसे युगों के रोमानी ऐन्द्रजालिक सम्मोहक से उबारकर एक नए दौर के साथ जोड़कर दिखाया। वस्तुतः मोहन राकेश के नाटक केवल हिन्दी के नाटक नहीं हैं। वे हिन्दी में लिखे अवश्य गए हैं, किन्तु वे समकालीन भारतीय नाट्य प्रवृत्तियों के द्योतक हैं। उन्होंने हिन्दी नाटक को पहली बार अखिल भारतीय स्तर ही नहीं प्रदान किया वरन् उसके सदियों के अलग-थलग प्रवाह को विश्व नाटक की एक सामान्य धारा की ओर भी अग्रसर किया। प्रमुख भारतीय निर्देशकों इब्राहीम अलकाजी,ओम शिवपुरी, अरविन्द गौड़, श्यामानन्द जालान, राम गोपाल बजाज और दिनेश ठाकुर ने मोहन राकेश के नाटकों का निर्देशन किया।


मोहन राकेश के दो नाटकों आषाढ़ का एक दिन तथा लहरों के राजहंस में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेने पर भी आधुनिक मनुष्य के अंतर्द्वंद और संशयों की ही गाथा कही गयी है। एक नाटक की पृष्ठभूमि जहां गुप्तकाल है तो दूसरा बौद्धकाल के समय के ऊपर लिखा गया है। आषाढ़ का एक दिन में जहां सफलता और प्रेम में एक को चुनने के द्वन्द से जूझते कालिदास एक रचनाकार और एक आधुनिक मनुष्य के मन की पहेलियों को सामने रखते हैं वहीँ प्रेम में टूटकर भी प्रेम को नही टूटने देनेवाली इस नाटक की नायिका के रूप में हिंदी साहित्य को एक अविस्मरनीय पात्र मिला है।
लहरों के राजहंस में और भी जटिल प्रश्नों को उठाते हुए जीवन की सार्थकता, भौतिक जीवन और अध्यात्मिक जीवन के द्वन्द, दूसरों के द्वारा अपने मत को दुनिया पर थोपने का आग्रह जैसे विषय उठाये गए हैं। राकेश के नाटकों को रंगमंच पर मिली शानदार सफलता इस बात का गवाह बनी कि नाटक और रंगमंच के बीच कोई खाई नही है।
मोहन राकेश का तीसरा व सबसे लोकप्रिय नाटक आधे अधूरे है । जहाँ नाटककार ने मध्यवर्गीय परिवार की दमित इच्छाओ कुंठाओ व विसंगतियो को दर्शाया है । इस नाटक की पृष्ठभूमि एतिहासिक न होकर आधुनिक मध्यवर्गीय समाज है । आधे अधूरे मे वर्तमान जीवन के टूटते हुए संबंधो ,मध्यवर्गीय परिवार के कलहपुर्ण वातावरण विघटन ,सन्त्रास ,व्यक्ति के आधे अधूरे व्यक्तित्व तथा अस्तित्व का यथात्मक सजीव चित्रण हुआ है ।
मोहन राकेश का यह नाटक , अनिता औलक की कहनी दिन से दिन का नाट्यरुपांतरण है ।



प्रमुख कृतियाँ


  • उपन्यास
अंधेरे बंद कमरे, अन्तराल, न आने वाला कल।
  • नाटक

आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे अधूरे। अण्डे के छिलके



  • कहानी संग्रह
क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, पहचान तथा अन्य कहानियाँ, वारिस तथा अन्य कहानियाँ।
  • निबंध संग्रह
परिवेश
  • अनुवाद
मृच्छकटिक, शाकुंतलम।
  • यात्रा वृताँत
आखिरी चट्टान


सम्मान


संगीत नाटक अकादमी,१९६८



सन्दर्भ



बाहरी कड़ियाँ



  • अपने दौर के महानायक कहलाए मोहन राकेश (प्रभासाक्षी)


  • नई कहानी आंदोलन के स्तंभ मोहन राकेश (प्रभासाक्षी)









Popular posts from this blog

Why is the 'in' operator throwing an error with a string literal instead of logging false?Why can't I use switch statement on a String?Python join: why is it string.join(list) instead of list.join(string)?Multiline String Literal in C#Why does comparing strings using either '==' or 'is' sometimes produce a different result?How to initialize an array's length in javascript?How can I print literal curly-brace characters in python string and also use .format on it?Why does ++[[]][+[]]+[+[]] return the string “10”?Why is char[] preferred over String for passwords?Why does this code using random strings print “hello world”?jQuery.inArray(), how to use it right?

बाताम इन्हें भी देखें सन्दर्भ दिक्चालन सूची1°05′00″N 104°02′0″E / 1.08333°N 104.03333°E / 1.08333; 104.033331°05′00″N 104°02′0″E / 1.08333°N 104.03333°E / 1.08333; 104.03333

Reverse int within the 32-bit signed integer rangeReverse int within the 32-bit signed integer range: $[−2^31, 2^31 − 1]$ OptimizedCombining two 32-bit integers into one 64-bit integerDetermine if an int is within rangeLossy packing 32 bit integer to 16 bitComputing the square root of a 64-bit integerKeeping integer addition within boundsSafe multiplication of two 64-bit signed integersLeetcode 10: Regular Expression MatchingReverse the digits of an Integer“Add two numbers given in reverse order from a linked list”Reverse int within the 32-bit signed integer range: $[−2^31, 2^31 − 1]$ Optimized