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वैदिक धर्मउपनिषददर्शन


सामवेदियउपनिषदवेदव्यास




कुण्डिकोपनिषद सामवेदिय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यत वेदव्यास जी को कई उपनिषदों का लेखक माना जाता है।
















कुण्डिकोपनिषद  
उपनिषद.gif
लेखक
वेदव्यास
चित्र रचनाकार
अन्य पौराणिक ऋषि
देश
भारत
भाषा
संस्कृत
श्रृंखला
सामवेदिय उपनिषद
विषय
ज्ञान योग, द्वैत अद्वैत सिद्धान्त
प्रकार
हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ


अनुक्रम





  • 1 रचनाकाल


  • 2 सन्दर्भ


  • 3 बाहरी कड़ियाँ

    • 3.1 मूल ग्रन्थ


    • 3.2 अनुवाद





रचनाकाल


उपनिषदों के रचनाकाल के सम्बन्ध में विद्वानों का एक मत नहीं है। कुछ उपनिषदों को वेदों की मूल संहिताओं का अंश माना गया है। ये सर्वाधिक प्राचीन हैं। कुछ उपनिषद ‘ब्राह्मण’ और ‘आरण्यक’ ग्रन्थों के अंश माने गये हैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है—


  1. पुरातत्व एवं भौगोलिक परिस्थितियां

  2. पौराणिक अथवा वैदिक ॠषियों के नाम

  3. सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राजाओं के समयकाल

  4. उपनिषदों में वर्णित खगोलीय विवरण

निम्न विद्वानों द्वारा विभिन्न उपनिषदों का रचना काल निम्न क्रम में माना गया है[1]-






























विभिन्न विद्वानों द्वारा वैदिक या उपनिषद काल के लिये विभिन्न निर्धारित समयावधि
लेखकशुरुवात (BC)समापन (BC)विधि
लोकमान्य तिलक (Winternitz भी इससे सहमत है)6000200खगोलिय विधि
बी. वी. कामेश्वर23002000खगोलिय विधि
मैक्स मूलर1000800भाषाई विश्लेषण
रनाडे1200600भाषाई विश्लेषण, वैचारिक सिदान्त, etc
राधा कृष्णन800600वैचारिक सिदान्त








मुख्य उपनिषदों का रचनाकाल
डयुसेन (1000 or 800 – 500 BC)रनाडे (1200 – 600 BC)राधा कृष्णन (800 – 600 BC)

अत्यंत प्राचीन उपनिषद गद्य शैली में: बृहदारण्यक, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, कौषीतकि, केन
कविता शैली में: केन, कठ, ईश, श्वेताश्वतर, मुण्डक
बाद के उपनिषद गद्य शैली में: प्रश्न, मैत्री, मांडूक्य

समूह I: बृहदारण्यक, छान्दोग्य
समूह II: ईश, केन
समूह III: ऐतरेय, तैत्तिरीय, कौषीतकि
समूह IV: कठ, मुण्डक, श्वेताश्वतर
समूह V: प्रश्न, मांडूक्य, मैत्राणयी

बुद्ध काल से पूर्व के:' ऐतरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन
मध्यकालीन: केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य
सांख्य एवं योग पर अधारित: मैत्री, श्वेताश्वतर


सन्दर्भ



  1. Ranade 1926, pp. 13–14


बाहरी कड़ियाँ


  • उपनिषदों ने आत्मनिरीक्षण का मार्ग बताया


मूल ग्रन्थ


  • Upanishads at Sanskrit Documents Site

  • पीडीईएफ् प्रारूप, देवनागरी में अनेक उपनिषद

  • GRETIL

  • TITUS


अनुवाद


  • Translations of major Upanishads

  • 11 principal Upanishads with translations

  • Translations of principal Upanishads at sankaracharya.org

  • Upanishads and other Vedanta texts

  • डॉ मृदुल कीर्ति द्वारा उपनिषदों का हिन्दी काव्य रूपान्तरण


  • Complete translation on-line into English of all 108 Upaniṣad-s [not only the 11 (or so) major ones to which the foregoing links are meagerly restricted]-- lacking, however, diacritical marks










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